निवेशकों द्वारा यूनिटों की बिक्री करने या स्कीम की अवधि पूरी होने या फिर लाभांश की रकम मिलने पर, म्यूचुअल फंडों द्वारा निवेशकों को भुगतान किया जाता है । भुगतान करने के लिए, म्यूचुअल फंड या तो निवेशकों के बैंक खातों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पैसे जमा कर देते हैं या फिर उनके रिकॉर्ड में निवेशकों को जो पता होता है, उस पते पर चेक भेज देते हैं ।
जब कभी म्यूचुअल फंडों द्वारा किया गया भुगतान निवेशक के बैंक खाते में जमा नहीं हो पाता या निवेशक उस चेक को भुना नहीं पाते, तो ऐसी रकम को ‘दावा न की गई रकम’ मान लिया जाता है । भुगतान निवेशकों के खातों में जमा न होने के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि निवेशक का बैंक खाता बदल गया हो, बैंक खाता बंद हो गया हो, रिकॉर्ड में बैंक खाते संबंधी विवरण अधूरे हों, निवेशक को चेक प्राप्त न हुआ हो या निवेशक द्वारा चेक को भुनाया न गया हो, निवेशकों द्वारा पते को अपडेट न कराया गया हो, आदि ।
यदि निवेशक ने केवाईसी न करवाई हो, तो उसे भुगतान नहीं हो पाता । इसलिए, ऐसी रकम भुगतान की तारीख को सीधे अनक्लेम्ड स्कीम में जमा कर दी जाती है ।
निवेशकों की सुविधा के लिए ‘दावा न की गई रकम’ की जानकारी आस्ति प्रबंध कंपनी (एएमसी) और रजिस्ट्रार एवं शेयर अंतरण अभिकर्ता (आरटीए) की वेबसाइटों पर उपलब्ध करवाई जाती है ।
‘दावा न की गई रकम’ के बारे में जानने के लिए निवेशक एमएफ सेंट्रल की वेबसाइट (www.mfcentral.com) पर भी लॉग-इन कर सकते हैं । ‘दावा न की गई रकम’ के बारे में पता लगाने के लिए निवेशक को अपना यूज़र आईडी, पासवर्ड और ओटीपी डालकर लॉग-इन करना होगा ।
भुगतान न की गई रकम / ‘दावा न की गई रकम’ की जानकारी निवेशक को समेकित खाता विवरण (सी.ए.एस.) में दी जाती है ।
म्यूचुअल फंड समय-समय पर ईमेल आदि भेजकर या सूचना जारी करके निवेशकों को ‘दावा न की गई रकम’ की जानकारी देते रहते हैं ।
मित्र निवेशकों हेतु बनाया गया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसकी मदद से म्यूचुअल फंडों के ऐसे फोलियो के बारे में पता लगाया जा सकता है, जिनमें कोई लेनदेन नहीं किया जा रहा अर्थात् जो सक्रिय नहीं है । इसके अलावा, इसकी मदद से म्यूचुअल फंड में किए गए ऐसे निवेशों का भी पता लगाया जा सकता है जिनके संबंध में कोई दावा न किया गया हो । फोलियो सक्रिय न होने का अर्थ है कि उस फोलियो में निवेशक ने पिछले 10 वर्षों में किसी भी तरह का कोई लेनदेन नहीं किया है, पर उस फोलियो में यूनिटें पड़ी हुई हैं ।
मित्र प्लेटफॉर्म पर जाने का लिंक एमएफ सेंट्रल की वेबसाइट (www.mfcentral.com) के मुखपृष्ठ पर दिया हुआ है । इस प्लेटफॉर्म पर जाकर निवेशक अपनी ‘दावा न की गई रकम’ के बारे में जान सकते हैं या ऐसे निवेश की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जो अब सक्रिय नहीं हैं । इसके लिए, उन्हें अपेक्षानुसार कुछ ब्यौरे भरने होते हैं । यदि निवेशकों द्वारा भरे गए ब्यौरे मेल खाते हैं, तो उन्हें उन म्यूचुअल फंडों के नाम दिख जाएंगे जहाँ उनके ऐसे निवेश पड़े हुए हैं । इसके बाद, निवेशक संबंधित म्यूचुअल फंड या आरटीए से संपर्क कर सकते हैं और अपनी ‘दावा न की गई रकम’ के संबंध में दावा कर सकते हैं । दावा करने की प्रकिया और उससे संबंधित एफएक्यू (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न) मित्र प्लेटफॉर्म पर दिए हुए हैं ।
निवेशक को एएमसी की वेबसाइट से संबंधित फॉर्म डाउनलोड करना होगा और उसे भरकर उस पर हस्ताक्षर करने के बाद एएमसी / आरटीए के कार्यालय में जमा करना होगा । फॉर्म में भरी गई जानकारी को रिकॉर्ड से मिलाने के बाद और हस्ताक्षर का मिलान करने के बाद, यूडीआरएस से ‘दावा न की गई रकम’ का भुगतान किया जाएगा, और साथ ही एन.ए.वी. में हुई मूल्यवृद्धि भी दी जाएगी ।
निवेशक दावे की प्रक्रिया से जुड़े सवालों के लिए आरटीए (जो उस एएमसी का आरटीए हो, जिसके यहाँ निवेशक की ‘दावा न की गई रकम’ पड़ी हो) से संपर्क कर सकते हैं । दोनों आरटीए के संपर्क संबंधी ब्यौरे उनकी वेबसाइट पर “Contact Us” शीर्षक के तहत दिए हुए हैं।
यदि 7 कार्य-दिवसों के भीतर निवेशक को पैसा नहीं मिलता है या फिर उनके दावे को नामंजूर किए जाने की वजह भी उन्हें नहीं बताई जाती है, तो ऐसे में निवेशक संबंधित एएमसी / आरटीए के कार्यालय में जाकर या एएमसी के निवेशक सेवा केंद्र में जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है । शिकायत दर्ज करने के लिए एएमसी के निवेशक सेवा केंद्र और उसकी ईमेल आईडी से संबंधित ब्यौरे एएमसी की वेबसाइट पर “Contact Us” खंड के अंतर्गत दिए होते हैं। यदि एएमसी / आरटीए निर्धारित अवधि के भीतर शिकायत का निवारण नहीं करता या फिर निवेशक उनकी ओर से दिए गए जवाब से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वे सेबी के स्कोर्स पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं ।
म्यूचुअल फंड को यह इजाज़त दी गई है कि वे ‘दावा न की गई रकम’ को कॉल मनी मार्केट, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट या फिर ओवरनाइट स्कीम / लिक्विड स्कीम / मनी मार्केट म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकते हैं । इस तरह की स्कीमों में बहुत कम जोखिम होता है और रिटर्न भी मिलता रहता है । म्यूचुअल फंडों द्वारा ‘दावा न की गई रकम’ का निवेश करने के लिए विशेष रूप से स्कीम लाई जाती है जिसे अनक्लेम्ड डिविडेंड / रिडेंप्शन स्कीम (यूडीआरएस) के नाम से जाना जाता है ।
चूँकि ‘दावा न की गई रकम’ को लिक्विड या ओवरनाइट स्कीमों में लगाया जाता है, इसलिए एएमसी इन स्कीमों में हुई मूल्यवृद्धि को रोजाना एन.ए.वी. के रूप में दर्शाती है । इन स्कीमों में यूनिटें जारी होने की तारीख से 3 वर्षों के भीतर हुई मूल्यवृद्धि निवेशकों को दे दी जाती है और 3 वर्षों के बाद हुई मूल्यवृद्धि निवेशक शिक्षण निधि में जमा कर दी जाती है ।
यह आबंटन हर सप्ताह या 15 दिनों में एक बार किया जाता है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि अनपेड इंस्ट्रूमेंट के संबंध में बैंकों द्वारा जानकारी कब दी जाती है ।
निवेशकों ने जिस आरटीए / एएमसी के यहाँ निवेश किया है वहाँ अपना पैन / केवाईसी, पता, बैंक खाते आदि से संबंधित ब्यौरे हमेशा अपडेट करते रहना चाहिए । यूनिटों की बिक्री करने के लिए आवेदन करने के बाद, उन्हें इस बात की पुष्टि कर लेनी चाहिए कि पैसे उनके बैंक खाते में जमा हो गए हों । यदि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जमा किया गया पैसा [जहाँ बैंक की पूरी जानकारी (जैसे सीबीएस अकाउंट संख्या और आईएफएस कोड) दी गई हो] 3 कार्य-दिवसों के भीतर प्राप्त नहीं होता है या फिर चेक के माध्यम से जमा किया गया पैसा 5 से 7 कार्य-दिवसों के भीतर प्राप्त नहीं होता है, तो निवेशकों को आरटीए / एएमसी या अपने डिस्ट्रीब्यूटर के निकटतम कार्यालय से संपर्क करना चाहिए ।
दावा करने की प्रक्रिया
- ‘दावा न की गई रकम’ के संबंध में दावा करने के लिए निवेशक संबंधित आस्ति प्रबंध कंपनी (एएमसी) या रजिस्ट्रार एवं शेयर अंतरण अभिकर्ता (आरटीए) से संपर्क कर सकते हैं या उनकी वेबसाइट से संबंधित फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं । यह फॉर्म संबंधित आरटीए या एएमसी के कार्यालय में जमा करना होता है । आरटीए निवेशक के हस्ताक्षर और अन्य ब्यौरों की जाँच करेगा और सब कुछ सही पाए जाने पर आवेदन पर कार्यवाही करेगा । यदि फॉर्म में कोई त्रुटि पाई जाती है या फिर हस्ताक्षर मेल नहीं खाते हैं, तो आरटीए निवेशक को इस बात की जानकारी देगा कि उनके फॉर्म के संबंध में कार्यवाही क्यों नहीं की गई है और साथ ही, यह भी बताएगा कि निवेशक को इस संबंध में अब क्या करना होगा ।
- अनक्लेम्ड स्कीम से संबंधित भुगतान को रिडेंप्शन माना जाता है, इसलिए इस संबंध में एन.ए.वी., फॉर्म प्राप्त होने की तारीख और समय के अनुसार होगी और भुगतान 2 से 5 दिनों के भीतर किया जाएगा ।
रिडेंप्शन करने पर भुगतान – भुगतान की रकम की गणना इस प्रकार की जाएगी
- पहली स्थिति – 3 वर्षों के भीतर किए जाने वाले भुगतान के मामले में: रिडेंप्शन की रकम यूडीआरएस से दी जाएगी । यह रकम अनक्लेम्ड स्कीम की लागू एन.ए.वी. के अनुसार दी जाएगी, जिसमें स्कीम की एन.ए.वी. में हुई मूल्यवृद्धि भी शामिल है ।
- दूसरी स्थिति – 3 वर्षों के बाद किए जाने वाले भुगतान के मामले में: अनक्लेम्ड स्कीम की यूनिटों की एन.ए.वी. में हुई मूल्यवृद्धि निवेशक शिक्षण निधि में जमा कर दी जाएगी और अनक्लेम्ड स्कीम में जिस तारीख को यूनिटें जारी की गई हों उस तारीख से 3 वर्षों की अवधि के बाद की एन.ए.वी. के अनुसार यूनिटों को रीडीम किया जाएगा ।
- तीसरी स्थिति – निवेशक द्वारा प्रतिभूति बाजार (सिक्यूरिटीज़ मार्केट) में लेनदेन करने या फोलियो अपडेट करने के मामले में: यदि कोई ऐसी जानकारी मिली हो, जिसके आधार पर ‘दावा न की गई रकम’ के संबंध में कार्यवाही की जा सकती हो, तो ऐसे में अनक्लेम्ड स्कीमों में से स्वत: ही रिडेंप्शन कर दिया जाएगा और रिडेंप्शन से मिली रकम निवेशक के खाते में जमा कर दी जाएगी ।